मेरी पड़ोसन रश्मि भाभी के साथ चुदाई
हाय दोस्तों, मेरा नाम मयंक है। उम्र 24 साल, दिल्ली के एक मिडिल क्लास इलाके में रहता हूँ। फिगर अच्छा है – जिम जाता हूँ, 5'10" हाइट, ब्रॉड चेस्ट, और हाँ... नीचे वाला भी 7 इंच का मोटा और सख्त।
मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा हूँ, लेकिन घर पर ज्यादा टाइम स्पेंड करता हूँ। हमारा घर दो मंजिला है, और बगल में नई फैमिली शिफ्ट हुई थी – संजय अंकल, उनकी वाइफ रश्मि भाभी, और उनका 3 साल का बेटा। संजय अंकल बैंक में मैनेजर हैं, सुबह जाते, रात को देर से आते।
रश्मि भाभी... ओह गॉड! पहली नजर में ही दिल धड़क गया। उम्र लगभग 30-32 साल, फिगर 36-28-38। ब्रेस्ट इतने भरे-भरे कि साड़ी के ब्लाउज से बाहर आने को बेताब। कमर पतली, गांड गोल-मटोल, लहराती हुई। चेहरा गोरा, बड़े-बड़े आँखें, मोटे होंठ, लंबे बाल। वो हमेशा साड़ी पहनतीं – कभी लाल, कभी नीली, कभी ब्लैक। पल्लू थोड़ा नीचे, नाभि दिखती, ब्लाउज टाइट। मैं रोज बालकनी में खड़ा होकर उन्हें देखता। वो कपड़े सुखाने आतीं, झुकतीं तो ब्रेस्ट की क्लीवेज दिखती, गांड हिलती। मेरा लंड खड़ा हो जाता। रात को उनके नाम की मुठ मारता।
ये बात 6 महीने पहले की है। गर्मियाँ थीं, जुलाई का महीना। एक दिन बारिश हो रही थी, मैं बालकनी में खड़ा सिगरेट पी रहा था। रश्मि भाभी भी अपनी बालकनी में कपड़े समेट रही थीं। अचानक तेज हवा चली, उनका पल्लू उड़ गया, ब्लाउज गीला हो गया, ब्रा साफ दिख रही थी – ब्लैक कलर की। वो शर्मा कर पल्लू ठीक करने लगीं, लेकिन मेरी नजर उन पर थी। मैंने मुस्कुरा कर कहा, "भाभी, बारिश में भीग जाओगी, अंदर चली जाओ।" वो मुस्कुराईं, "हाँ मयंक, तुम भी अंदर जाओ, सिगरेट अच्छी नहीं।" पहली बार बात हुई। उस दिन से सलाम-दुआ शुरू हो गई।
धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। सुबह वो बालकनी में आतीं, मैं भी। "मयंक, चाय पीयोगे?" कभी वो पूछतीं। मैं उनके घर जाने लगा – कभी बेटे को खेलाने, कभी कुछ मदद करने। संजय अंकल ज्यादातर बाहर। भाभी घर में अकेली। एक दिन मैं उनके घर गया, वो किचन में थीं। साड़ी नीली, ब्लाउज डीप नेक। मैंने कहा, "भाभी, कुछ मदद चाहिए?" वो मुस्कुराईं, "हाँ, ऊपर वाली शेल्फ से मसाले निकाल दो।" मैं पीछे खड़ा हुआ, हाथ ऊपर किया – मेरा बदन उनका बदन छू रहा था। मेरी छाती उनकी पीठ से, और नीचे मेरा लंड उनकी गांड से रगड़ रहा था। वो सिहर गईं, लेकिन हटीं नहीं। मैंने जानबूझकर दबाया। वो धीरे से बोलीं, "मयंक... क्या कर रहे हो?" लेकिन आवाज में गुस्सा नहीं, शरारत थी।
उस दिन से टचिंग शुरू हो गई। कभी हाथ छूना, कभी कमर पर हाथ। भाभी भी बोल्ड हो गईं। एक दिन संजय अंकल आउट ऑफ स्टेशन गए 3 दिन के लिए। भाभी ने मुझे बुलाया, "मयंक, आज डिनर हमारे यहाँ।" मैं गया। बेटा सो गया। हम डिनर कर रहे थे, भाभी ने वाइन निकाली। "भाभी, आप पीती हो?" मैंने पूछा। वो हँसीं, "कभी-कभी।" हम पीने लगे। नशा चढ़ा। बातें पर्सनल हो गईं। "मयंक, तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं?" वो पूछीं। मैंने कहा, "नहीं भाभी, लेकिन मुझे एक शादीशुदा औरत बहुत पसंद है।" वो शर्मा गईं, "कौन?" मैंने उनकी आँखों में देखा, "आप।"
वो चौंकीं, लेकिन मुस्कुराईं। मैंने उनका हाथ पकड़ा, खींचकर गोद में बिठा लिया। "मयंक... ये गलत है... संजय..." लेकिन मैंने उनके होंठों पर होंठ रख दिए। किस इतना हॉट – उनकी जीभ मेरे मुंह में, मैं चूस रहा था। मेरे हाथ उनके ब्लाउज पर, ब्रेस्ट दबाने लगा। वो मोन उठीं, "आह्ह... मयंक... कितने दिन से तरस रही हूँ..." संजय अंकल सेक्स कम करते थे, ये बाद में पता चला। मैंने ब्लाउज खोला, ब्रा उतारी – वाह! गोल-गोल ब्रेस्ट, पिंक निप्पल्स। मैं चूसने लगा, काटने लगा। भाभी बेकाबू, "चूसो... जोर से... आह्ह..."
फिर मैंने साड़ी ऊपर की, पेटीकोट, पैंटी उतारी। उनकी चूत क्लीन शेव्ड, गुलाबी। मैंने घुटनों पर बैठकर चाटना शुरू किया। जीभ क्लिट पर, उंगलियाँ अंदर। भाभी चिल्ला रही थीं, "मयंक... कितना अच्छा लग रहा... संजय ने कभी नहीं किया... आह्ह..." 10 मिनट में वो झड़ गईं, रस मेरे मुंह पर। फिर भाभी ने मेरी पैंट उतारी, लंड देखकर चौंकीं, "इतना बड़ा... संजय का आधा भी नहीं।" वो चूसने लगीं – जैसे प्रो, गले तक ले रही थीं। मैं सिसकारियाँ भर रहा था।
फिर मैंने उन्हें बेड पर लिटाया, टाँगें फैलाईं, लंड सटाया। "भाभी... अंदर डालूँ?" वो बोलीं, "डालो... फाड़ दो मेरी चूत..." मैंने झटका दिया – आधा गया। वो चीखीं, "धीरे... कितना मोटा है..." फिर पूरा अंदर। मैं ठोकने लगा – धीरे फिर तेज। मिशनरी में 10 मिनट, फिर डॉगी। उनकी गांड मारते हुए कमाल लग रही थी। "ठोको... जोर से... चोदो अपनी पड़ोसन को..." वो कह रही थीं। मैंने 20 मिनट चुदाई की, फिर झड़ गया अंदर। वो भी 2 बार झड़ीं। हम पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे।
उस रात हम 3 राउंड कर चुके थे। सुबह तक सोए। संजय अंकल आए, लेकिन हमारा अफेयर शुरू हो गया। अब रोज मौका ढूंढते। एक बार संजय अंकल घर पर थे, लेकिन दोपहर में सो गए। भाभी मुझे अपनी बालकनी से इशारा किया। मैं उनके घर चला गया। बेटा स्कूल। हम किचन में। भाभी साड़ी में थीं, मैंने दीवार से सटाया, पीछे से साड़ी ऊपर की, लंड घुसाया। "मयंक... धीरे... कोई सुन लेगा..." लेकिन मैं तेज ठोक रहा था। उनकी मोन्स किचन में गूँज रही थीं।
एक और बार – रात को 1 बजे। संजय अंकल स्नोरिंग कर रहे थे। भाभी मेरे घर आईं – छत पर। हमने वहाँ चुदाई की। नंगी होकर, स्टार्स के नीचे। मैंने उन्हें उठाकर चोदा, फिर 69 किया। भाभी का मुंह मेरे लंड पर, मेरा मुंह उनकी चूत पर। फिर एनल ट्राई किया – पहले दर्द हुआ, लेकिन लुब्रिकेंट लगाकर अंदर। "आह्ह... मयंक... गांड मार रहे हो... कमाल है..." वो enjoy करने लगीं।
हमारा रिश्ता सिर्फ सेक्स नहीं, इमोशनल भी। भाभी कहतीं, "मयंक, तुमसे प्यार हो गया। संजय से तलाक लेकर तुमसे शादी कर लूँ?" मैं कहता, "भाभी, समाज क्या कहेगा?" लेकिन हम एंजॉय करते। कभी होटल, कभी कार में। एक बार कार में हाईवे पर – भाभी मेरे लंड पर बैठीं, उछल रही थीं।
धीरे-धीरे हम और रिस्की हो गए। एक बार दिवाली पर। सब घर पर, लेकिन रात को भाभी मेरे रूम में आईं। हमने धीरे-धीरे चुदाई की। बाहर पटाखे, अंदर हमारा धमाका। मैंने उनके बूब्स पर वीर्य गिराया, वो चाट गईं।
आज भी हमारा अफेयर चल रहा है। संजय अंकल को शक नहीं। भाभी प्रेग्नेंट होना चाहती हैं मेरे बच्चे से। मैं मयंक हूँ, और रश्मि भाभी मेरी पड़ोसन से ज्यादा – मेरी रखैल बन गईं। ये मेरी सच्ची कहानी है। पड़ोसन की चुदाई का मजा ही अलग है।
Antar Vasna