मेरे देवर ने बीयर पिलाकर करी जबरदस्त चुदाई
हाय दोस्तों, मैं अंजली हूँ। 28 साल की हूँ, लखनऊ की रहने वाली, लेकिन शादी के बाद दिल्ली में सेटल हूँ। मेरा फिगर 36-30-38 है – ब्रेस्ट भरे-भरे, कमर पतली और हिप्स ऐसे कि साड़ी में भी लहराते हुए लगते हैं। शादी को 6 साल हो गए, एक 4 साल का बेटा है – आरव।
मेरे पति, विक्रम, बिजनेस मैन हैं, ज्यादातर टूर पर रहते हैं – कभी दुबई, कभी सिंगापुर। घर में मैं, सास-ससुर, और मेरा देवर राहुल। राहुल 25 साल का है, जिम जाता है, बॉडी परफेक्ट – चौड़ी छाती, सिक्स पैक एब्स, हाइट 5'11", और आँखें ऐसी कि कोई भी लड़की फिसल जाए। वो घर से ही अपना ऑनलाइन बिजनेस चलाता है, इसलिए ज्यादातर घर पर ही रहता है।
मैं हमेशा साड़ी पहनती हूँ घर में – लाल, गुलाबी, ब्लैक, जो भी मूड हो। ब्लाउज टाइट, पेट बाहर, नाभि दिखती है। लोग कहते हैं कि मैं बहुत सेक्सी हूँ, और हाँ, मुझे अपनी बॉडी पर गर्व है। शादी के बाद सेक्स लाइफ ठीक-ठाक थी, लेकिन विक्रम की व्यस्तता की वजह से मैं अंदर से अधूरी सी रहती थी। रातें अकेली कटतीं, कभी-कभी खुद ही संतुष्ट कर लेती। लेकिन राहुल के आने के बाद सब बदल गया।
ये बात एक साल पहले की है। गर्मियाँ थीं, जून का महीना। सास-ससुर गाँव गए थे 15 दिन के लिए। घर में सिर्फ मैं, राहुल और आरव। आरव दिन में सोता ज्यादा था। एक रात डिनर के बाद मैं किचन में बर्तन धो रही थी। साड़ी हल्की गीली हो गई थी, ब्लाउज चिपक गया था। राहुल आया, "भाभी, मैं मदद करूँ?" मैंने कहा, "नहीं राहुल, तुम जाओ सो जाओ।" लेकिन वो पीछे खड़ा रहा। मुझे महसूस हुआ उसकी नजरें मेरी कमर पर, नाभि पर। मैंने मुस्कुरा कर इग्नोर किया।
फिर एक दिन बारिश हो रही थी। बिजली चली गई, जनरेटर भी फेल। मैं अपने रूम में थी, आरव सो रहा था। अचानक दरवाजा खटखटाया। राहुल था, "भाभी, मोमबत्ती है क्या?" मैंने दीया जलाया और उसे दिया। लेकिन जाते वक्त उसका हाथ मेरे हाथ से टच हुआ – जानबूझकर। उसकी आँखों में कुछ था। उस रात मैं सो नहीं पाई, राहुल को याद करके गर्म हो गई।
धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं। वो मुझे घूरता, मैं शर्मा जाती। एक दिन मैं नहा कर आई, साड़ी बदल रही थी। दरवाजा ठीक से बंद नहीं था। राहुल बाहर से देख रहा था – मेरी ब्रा, पैंटी। मैंने देख लिया, लेकिन कुछ नहीं कहा। बल्कि अंदर से मजा आया। शाम को वो मेरे रूम में आया, "भाभी, सॉरी वो गलती से..." मैंने कहा, "कोई बात नहीं राहुल, लेकिन अब से सावधान रहना।" लेकिन मेरी आवाज में शरारत थी। वो करीब आया, "भाभी, तुम बहुत खूबसूरत हो। भैया लकी हैं।" मैं शर्मा गई।
फिर वो दिन आया जब सब बदल गया। विक्रम विदेश गए थे 1 महीने के लिए। सास-ससुर अभी गाँव में ही थे। घर में सिर्फ हम तीन। एक रात आरव सो गया। मैं लिविंग रूम में टीवी देख रही थी, नीली साड़ी पहनी थी, ब्लाउज डीप नेक। राहुल आया, बियर की बोतल लेकर। "भाभी, जॉइन करोगी?" मैंने मना किया, लेकिन वो जिद करने लगा। हम बैठे, बातें होने लगीं। शराब के नशे में वो बोल पड़ा, "भाभी, मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ। रोज तुम्हें देखकर पागल हो जाता हूँ।" मैं चौंकी, लेकिन अंदर से खुशी हुई। मैंने कहा, "राहुल, ये गलत है। मैं तुम्हारी भाभी हूँ।" लेकिन वो करीब आया, मेरे होंठों पर होंठ रख दिए।
पहले तो मैं हटी, लेकिन उसका किस इतना पैशनेट था कि मैं पिघल गई। उसकी जीभ मेरे मुंह में, मैं चूसने लगी। उसके हाथ मेरी कमर पर, फिर बूब्स पर। "राहुल... कोई देख लेगा," मैंने कहा। वो बोला, "कोई नहीं है भाभी। आज मुझे अपना बना लो।" वो मुझे गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया। आरव अगले रूम में सो रहा था। उसने मुझे बेड पर लिटाया, साड़ी ऊपर सरका दी। मेरी टाँगें फैलाईं, पैंटी उतार दी। "भाभी, तुम्हारी चूत कितनी गुलाबी है," वो बोला और जीभ से चाटने लगा। मैं मोन उठी, "आह्ह... राहुल... कितना अच्छा लग रहा है..." वो क्लिट चूस रहा था, उंगलियाँ अंदर। 10 मिनट में मैं झड़ गई।
फिर मैंने उसकी पैंटी उतारी – वाह! कितना मोटा और लंबा लंड, 9 इंच तो होगा। मैंने मुंह में लिया, चूसने लगी। डीप थ्रोट, जीभ से टॉप घुमाया। राहुल सिसकारियाँ भर रहा था, "भाभी... तुम प्रो हो... आह्ह..." फिर वो ऊपर आया, मेरे ब्लाउज खोला, ब्रा उतारी। मेरे बूब्स चूसने लगा, निप्पल्स काटने लगा। मैं बेकाबू हो गई, "राहुल... अंदर डालो... मुझे चोदो।" उसने कंडोम लगाया और झटके से घुसा दिया। "आआह्ह्ह... राहुल... कितना बड़ा है... फाड़ दोगे!" दर्द और मजा दोनों। वो ठोकने लगा – धीरे-धीरे फिर तेज। मिशनरी, फिर डॉगी, फिर मैं ऊपर। पूरी रात हम चुदाई करते रहे। सुबह तक 4 राउंड।
उसके बाद हमारा अफेयर शुरू हो गया। रोज नई-नई जगह – किचन में, बाथरूम में, छत पर। एक बार तो आरव स्कूल गया था, सास-ससुर गाँव से लौटने वाले थे। हमने लिविंग रूम में किया। मैं साड़ी में थी, राहुल ने मुझे दीवार से सटाया, पीछे से घुसाया। "भाभी... तुम्हारी गांड कितनी सॉफ्ट है," वो कह रहा था, ठोकते हुए। मैं मोन रही थी, "और तेज... देवर जी... चोदो अपनी भाभी को।"
एक और यादगार दिन – दिवाली की रात। सब घर में थे, लेकिन रात को सब सो गए। राह Taskुल मेरे रूम में आया। मैं रेड साड़ी में थी। हमने धीरे-धीरे शुरू किया। वो मेरे बूब्स चूस रहा था, मैं उसका लंड सहला रही थी। फिर 69 पोजीशन। उसकी जीभ मेरी चूत में, मेरा मुंह उसके लंड में। फिर उसने मुझे खिड़की के पास घुटनों पर बिठाया, पीछे से चोदा। बाहर पटाखे चल रहे थे, अंदर हमारी चुदाई।
धीरे-धीरे हम और बोल्ड हो गए। एक बार विक्रम घर पर थे, लेकिन वो सो गए। राहुल रात को आया, हमने बालकनी में किया। ठंड थी, लेकिन हमारी बॉडी गर्म। वो मुझे उठाकर चोद रहा था। मेरा ऑर्गेज्म इतना जोरदार कि च Ring चीख निकल गई, लेकिन दबा ली।
हमारा रिश्ता सिर्फ सेक्स नहीं, प्यार भी हो गया। राहुल कहता, "भाभी, मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ।" मैं कहती, "पागल, समाज क्या कहेगा?" लेकिन अंदर से मैं भी चाहती थी। अब विक्रम फिर टूर पर हैं, और हम खुलकर एंजॉय करते हैं। कभी होटल, कभी ड्राइव। राहुल ने मुझे नई-नई पोजीशन सिखाई – एनल भी ट्राई किया एक बार। दर्द हुआ, लेकिन मजा भी।
मैं अंजली भाभी हूँ, और ये मेरी सच्ची कहानी है। देवर के साथ संबंध गलत है, लेकिन प्यार और सेक्स में क्या सही-गलत? आज भी राहुल मेरे पास है, उसका लंड मेरी चूत में। क्या तुम्हें मेरी स्टोरी पसंद आई? अगर हाँ, तो बताना।
Antar Vasna