ऑफिस की गुप्त चुदाई – मेरे जूनियर के टाइट गांड में लंड डाला

ऑफिस की गुप्त चुदाई – पढ़िए कैसे मैनेजर राहुल ने अपने हैंडसम जूनियर विक्रम को लेट नाइट ऑफिस में टेबल पर झुकाकर उसकी टाइट गांड में अपना मोटा लंड डाला। sensual किसिंग, blowjob और hardcore गे चुदाई की पूरी उत्तेजक हिंदी गे सेक्स स्टोरी।

मेरा नाम राहुल है। 28 साल, दिल्ली के एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मैनेजर। हाइट 5'11", अच्छी बॉडी, जिम जाता हूँ। ऑफिस में सब मुझे सख्त और प्रोफेशनल मानते हैं, लेकिन अंदर से मैं कुछ और ही था।

विक्रम हमारी टीम में नया जॉइन हुआ था। 26 साल, 6 फुट लंबा, ब्रॉड शोल्डर्स, स्मार्ट फेस, हल्की दाढ़ी और वो मुस्कान जो देखते ही दिल धड़क जाए। वो मेरे केबिन के बगल में ही बैठता था। शुरू-शुरू में सिर्फ प्रोफेशनल बातें होती थीं, लेकिन धीरे-धीरे लेट नाइट वर्किंग, कॉफी ब्रेक और चैटिंग ने रिश्ते को बदल दिया।

एक दिन ऑफिस में बहुत देर हो गई थी। प्रोजेक्ट डेडलाइन थी। पूरे फ्लोर पर सिर्फ हम दोनों बचे थे। एसी की ठंडी हवा चल रही थी। विक्रम ने अपनी शर्ट की ऊपरी दो बटन खोल दिए थे। उसकी छाती के बाल और मजबूत बॉडी दिख रही थी।

"सर, थक गए हो ना?" उसने पूछा, आँखों में कुछ खास चमक थी।

मैं मुस्कुराया, "हाँ, लेकिन अब काम खत्म हो गया।"

वो मेरे केबिन में आया, दरवाजा बंद किया और लॉक कर दिया। मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई।

"विक्रम... ये क्या?" मैंने हल्के से पूछा।

उसने मेरे पास आकर मेरी कुर्सी घुमाई और मेरे सामने घुटनों पर बैठ गया। उसकी गर्म साँसें मेरी जाँघों पर पड़ रही थीं।

"सर, बहुत दिनों से आपकी तरफ देख रहा हूँ... मुझे आप बहुत पसंद हैं।"

उसने मेरी पैंट पर हाथ रख दिया। मैं कुछ बोल नहीं पाया। उसकी उँगलियाँ मेरी जिप पर गईं और धीरे-धीरे खोल दी। मेरा लंड पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था। विक्रम ने मेरी अंडरवियर नीचे की और मेरा मोटा लंड बाहर निकाल लिया।

"वाह सर... कितना मोटा और सुंदर है," कहते हुए उसने अपनी गर्म जीभ से लंड के टॉप को चाटा।

मैं कराह उठा, "उफ्फ... विक्रम..."

वो पूरा प्रोफेशनल था। धीरे-धीरे पूरा लंड मुंह में ले लिया, गले तक। ऊपर-नीचे करने लगा, जीभ से घुमा रहा था। कभी-कभी गहरी चूसाई, कभी सिर्फ टॉप चूसता। मेरे हाथ उसके बालों में थे। मैं उसका सिर दबा रहा था।

10 मिनट बाद मैंने उसे उठाया और चूम लिया। हमारा पहला किस बहुत गहरा और जुनूनी था। जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। मैंने उसकी शर्ट उतारी। उसकी छाती, निप्पल्स, सिक्स पैक — सब परफेक्ट था। मैंने उसके निप्पल्स चूसने शुरू कर दिए। वो कराह रहा था, "आह्ह... सर... और जोर से..."

फिर मैंने उसे टेबल पर झुका दिया। उसकी पैंट और अंडरवियर नीचे की। उसकी गोल, सफेद, टाइट गांड सामने थी। मैंने थूक लगाया और अपनी उँगली अंदर डाली। विक्रम सिसकारिया, "धीरे सर... पहली बार है..."

मैंने धीरे-धीरे फिंगरिंग की, फिर दो उँगलियाँ। जब वो तैयार हो गया तो मैंने अपना लंड उसके गांड पर रखा और धीरे से दबाया।

"आआह्ह्ह..." विक्रम ने दर्द से कराहा, लेकिन पीछे धक्का भी मार रहा था।

आधा लंड अंदर चला गया। फिर पूरा। मैं रुक गया, उसे अपनी गांड की गर्मी और टाइटनेस का मजा लेने दिया। फिर धीरे-धीरे ठोकना शुरू किया।

हर ठोके के साथ विक्रम की मोन बढ़ रही थी — "सर... और तेज... चोदिए मुझे... आपका लंड बहुत अच्छा लग रहा है..."

मैंने स्पीड बढ़ा दी। टेबल हिल रही थी। मैं उसकी कमर पकड़े जोर-जोर से ठोक रहा था। कभी-कभी उसके बाल खींचता, कभी गले पर किस करता। पूरा ऑफिस खाली था, सिर्फ हमारी साँसें और चुदाई की आवाज गूँज रही थी।

मैंने उसे घुमाया, टेबल पर लिटाया और उसके पैर अपने कंधों पर रखकर दोबारा घुसा दिया। अब आमने-सामने। हमारी आँखें मिली हुई थीं। मैं तेज-तेज ठोक रहा था। विक्रम का अपना लंड भी पूरा खड़ा था। मैंने उसे भी हिलाने लगा।

"सर... मैं झड़ने वाला हूँ..."

"मैं भी..."

हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने अपना गरम वीर्य उसकी गांड के अंदर भर दिया, और उसका वीर्य मेरे पेट और छाती पर गिरा।

हम दोनों पसीने से तर थे। मैंने उसे चूम लिया। बहुत देर तक हम ऐसे ही लिपटे रहे।

उसके बाद ये हमारी रोज की आदत बन गई। कभी मीटिंग रूम में, कभी लेट नाइट ऑफिस में, कभी कार में। विक्रम मेरी सबसे हॉट और गुप्त लव बन गया।