मेरी ऑफिस वाली क्लाइंट के साथ वो हॉट चुदाई
हाय, मैं स्नेहा हूँ। 26 साल की, दिल्ली में एक प्राइवेट मार्केटिंग फर्म में काम करती हूँ। मूल रूप से लखनऊ की हूँ, लेकिन नौकरी के लिए दिल्ली आ गई। फिगर मेरा 34-28-36 है – ब्रेस्ट भरे-भरे, कमर पतली, और हिप्स ऐसे कि टाइट स्कर्ट में सबकी नजरें वहीं अटक जाती हैं। ऑफिस में मैं प्रोफेशनल ड्रेस पहनती हूँ – पेंसिल स्कर्ट, शर्ट, हाई हील्स। बाल लंबे, घने, और लिपस्टिक हमेशा बोल्ड रेड। लोग कहते हैं कि मैं देखने में ग्लैमरस हूँ, और हाँ, मुझे अपनी बॉडी पर गर्व है। क्लाइंट्स की मीटिंग्स में मेरी स्माइल और कॉन्फिडेंस से डील पक्की हो जाती है, लेकिन कभी-कभी... वो नजरें कुछ और ही कहती हैं।
ये बात तीन महीने पहले की है। हमारी कंपनी को एक बड़ा क्लाइंट मिला था – विक्रम शर्मा। 32 साल का हैंडसम बिजनेसमैन, अपनी खुद की आईटी कंपनी चलाते हैं। हाइट 6 फुट, ब्रॉड शोल्डर्स, जिम बॉडी, हल्की दाढ़ी, और आँखें ऐसी कि कोई लड़की डूब जाए। पहली मीटिंग में ही कुछ अजीब सा लगा। मीटिंग रूम में मैं प्रेजेंटेशन दे रही थी, और विक्रम की नजरें मेरे चेहरे से नीचे – मेरे ब्लाउज के बटन पर, स्कर्ट की स्लिट पर। मैंने नोटिस किया, लेकिन इग्नोर किया। प्रोफेशनल रहना था ना। लेकिन अंदर से कुछ सिहरन सी हो रही थी।
मीटिंग खत्म हुई तो विक्रम ने कहा, "स्नेहा, तुम्हारा प्रेजेंटेशन कमाल का था। डिटेल्स डिस्कस करने के लिए क्या आज शाम को लेट तक रुक सकती हो? सिर्फ हम दोनों।" मैंने हाँ कह दिया। ऑफिस में सब चले गए, सिर्फ मैं और विक्रम बचे। एसी की ठंडक, लाइट्स डिम, और बाहर बारिश शुरू हो गई थी। हम कॉन्फ्रेंस रूम में थे। मैंने ब्लैक पेंसिल स्कर्ट और व्हाइट शर्ट पहना था, ऊपर के दो बटन खुले – गर्मी की वजह से। विक्रम शर्ट की स्लीव्स फोल्ड करके बैठा था, उसकी मसल्स दिख रही थीं।
बातें शुरू हुईं प्रोजेक्ट पर, लेकिन धीरे-धीरे पर्सनल हो गईं। "स्नेहा, तुम सिंगल हो?" उसने पूछा, आँखों में शरारत। मैं शर्मा गई, "हाँ... अभी तक तो।" वो करीब आया, "तुम बहुत हॉट हो, पता है?" उसका हाथ मेरे हाथ पर था। मैंने हाथ नहीं हटाया। अचानक उसने मुझे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। "विक्रम... ये क्या..." मैंने कहा, लेकिन आवाज में मना नहीं था। उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए। किस इतना वाइल्ड, इतना पैशनेट – उसकी जीभ मेरे मुंह में, मैं चूसने लगी। उसके हाथ मेरी कमर पर, फिर ऊपर – मेरे बूब्स दबाने लगे।
"स्नेहा... तुम्हारी बॉडी कमाल की है," उसने ग्रंट करते हुए कहा। मैं पिघल रही थी। मैंने उसकी शर्ट के बटन खोले, उसकी छाती पर किस किया। मसल्स कितने हार्ड थे! वो उठा और मुझे टेबल पर लिटा दिया। मेरी स्कर्ट ऊपर सरका दी। पैंटी ब्लैक लेस वाली थी, गीली हो चुकी थी। विक्रम ने घुटनों पर बैठकर मेरी टाँगें फैलाईं और चेहरे को मेरी चूत के करीब ले गया। "ओह्ह... विक्रम..." मैं मोन उठी जब उसकी जीभ क्लिट पर लगी। वो चूस रहा था, चट रहा था जैसे भूखा हो। दो उंगलियाँ अंदर, तेज-तेज फिंगरिंग। मेरी चूत से रस बह रहा था। मैंने उसके बाल पकड़े, खुद को उसके मुंह पर दबाया। 5 मिनट में ही मेरा पहला ऑर्गेज्म आ गया – बदन काँप उठा, चीख निकल गई।
विक्रम उठा, उसकी पैंट में उभार साफ दिख रहा था। मैंने जिप खोली और लंड बाहर निकाला – वाह! कितना मोटा और लंबा, कम से कम 8 इंच। टॉप पर वेन पॉप आउट हो रही थीं। मैंने मुंह में लिया, चूसने लगी। ऊपर-नीचे, जीभ से घुमाया। विक्रम सिसकारियाँ भर रहा था, "स्नेहा... तुम प्रो हो... आह्ह..." मैंने गले तक लिया, डीप थ्रोट। वो बेकाबू हो गया। मुझे उठाया, टेबल पर झुकाया – पीछे से। पैंटी साइड की और झटके से लंड अंदर घुसा दिया। "आआह्ह्ह... विक्रम... कितना बड़ा है... फाड़ दोगे!" मैं चिल्लाई, लेकिन मजा अलग लेवल का था।
वो ठोक रहा था – जोर-जोर से। हर धक्के में टेबल हिल रही थी। एक हाथ से मेरे बाल पकड़े, दूसरे से बूब्स मसल रहा था। मैं खुद पीछे धक्के मार रही थी। "फास्टर... विक्रम... और तेज..." मैं कह रही थी। ऑफिस में सिर्फ हमारे मोन्स और धक्कों की आवाजें गूँज रही थीं। बारिश बाहर तेज हो गई, जैसे हमारी सेक्स की रिदम मैच कर रही हो। विक्रम ने मुझे घुमाया, टेबल पर लिटाया और सामने से घुसाया। मेरी टाँगें उसके कंधों पर। अब गहराई और बढ़ गई। उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था। मैं नाखून उसकी पीठ पर गाड़ रही थी।
"स्नेहा... तुम्हारी चूत कितनी टाइट और जूसी है... मैं झड़ने वाला हूँ," वो बोला। मैंने कहा, "अंदर ही... मुझे तुम्हारा वीर्य चाहिए।" उसने स्पीड बढ़ाई, 10-15 जोरदार ठोके और गरम-गरम रस मेरी चूत में छोड़ दिया। मैं भी साथ में झड़ी – दूसरा ऑर्गेज्म, इतना इंटेंस कि आँखें बंद हो गईं। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे। विक्रम ने मुझे किस किया, "ये डील पक्की, और हमारी भी।"
उसके बाद हमने कपड़े ठीक किए। विक्रम चला गया, लेकिन मैसेज आया, "कल फिर मीटिंग?" हम मिलते रहे – कभी उसके ऑफिस, कभी होटल। लेकिन वो पहली ऑफिस वाली नाइट... आज भी याद करके गर्म हो जाती हूँ। लखनऊ की सीधी-सादी लड़की से दिल्ली ने मुझे बोल्ड बना दिया। क्लाइंट मीटिंग्स अब मेरे लिए सिर्फ बिजनेस नहीं रहतीं। हाहा... मैं स्नेहा हूँ, और ये मेरी सबसे हॉट ऑफिस स्टोरी है।
Antar Vasna